Dec 28
चुनौती
Hindi Poetry by Avdhesshत्वरा से बढे चलो,
हृदय है तुम्हारा निष्कपट, तो फिर क्यूँ है झिझक?
धूल भरा है मार्ग, शायद कांटे भी हों |
पथ ही जो ठहरा…बिना जख्म पाए गुज़र जाओ जिससे वो राह कैसी?
परीक्षा है यही तो, यही है कसौटी |
शायद मार्ग में मिलें गिद्ध, और नोच डालें बोटी-बोटी |
फिर भी बढे चलो..
क्यों?
क्योंकि यही है आत्म रंजन
आग से गुज़रकर ही स्वर्ण कहलाता है कुंदन!